BIG JOKE: जमाई के साथ (ससुराल में) सास-ससुर का व्यवहार...!
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जमाई के साथ (ससुराल में) सन् 1990 से पहले और उसके बाद किए जाने वाले व्यवहार के बारे में- पहले जब जमाई के आने का पता चलता तो ससुर जी दाढ़ी बनाकर और नए कपड़े पहनकर स्वागत के लिए कम्पलीट रहते थे। जमाई आ जाते तो बहुत मान मनवार मिलती और छोरी दौड़कर रसोई में घुस जाती थी। सासुजी पानी पिलातीं और धीरे से कहती आग्या कांई? आने का समाचार मिलते ही गली मोहल्ले के लोग चाय के लिए बुलाते और काकी सासुजी या भाभियां आट का हलवा बनातीं। जमाई खुद को ऐसा महसूस करता था कि वो पूरे गांव का जमाई है। जमाई के घर में आने के बाद घर के सब लोग अनुशासन में आ जाते थे। जमाई बाथरूम से निकलते तो उनके हाथ बढ़िया साबुन से धुलवाते, भले खुद लोकल साबुन से नहाते थे। जमाई अगर रात में रुक जाते तो सुबह उनका साला टूथ पेस्ट और ब्रश हाथ में लेकर आसपास घूमता रहता था। जब जमाई का अपनी बीवी को लेकर जाने का समय हो जाता तो वो स्कूटर को पहले गियर में डालकर भन्ना भोट निकालते थे, जिससे उनका ससुराल में प्रभाव बना रहता था। अब आज के जमाई की दुर्दशा अब आज के जमाई की दुर्दशा आज के जमाई से कोई भी लुगाई लाज नहीं करती है, खुद की बीवी भी वेस्टर्न ड्रेस में आसपास घूमती रहती है। काकी सासुजी और भाभी कोई दूसरी रिश्तेदारी निकाल कर बोलती हैं :- "अपने तो जमाई वाला रिश्ता है ही नहीं।" साला अगर कुंवारा है और अगर उसकी सगाई नहीं हो पा रही है तो इसका ताना जमाई को सुनाया जाएगा- "तुम्हारा हो गया इसका भी तो कुछ सेट करो।" पानी पीना हो तो खुद रसोई में जाना पड़ेगा, कोई लाकर देने वाला नहीं है। ससुराल पक्ष की किसी शादी में जमाई को इसीलिए ज्यादा मनवार करके बुलाया जाता है ताकि जमाई बच्चों को संभाल सके, बीवी और सासुजी आराम से महिला संगीत में डांस कर सकें। अगर बीवी को ससुराल में जरा सा कुछ कह दिया तो सासुजी की तरफ से तुरंत जवाब आता है "एक से एक रिश्ते आए थे, पर ये ही मिला था छोरी को दुखी करने के लिए। असीम जैन, इंदौर Collapse
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जमाई के साथ (ससुराल में) सन् 1990 से पहले और उसके बाद किए जाने वाले व्यवहार के बारे में- पहले जब जमाई के आने का पता चलता तो ससुर जी दाढ़ी बनाकर और नए कपड़े पहनकर स्वागत के लिए कम्पलीट रहते थे। जमाई आ जाते तो बहुत मान मनवार मिलती और छोरी दौड़कर रसोई में घुस जाती थी। सासुजी पानी पिलातीं और धीरे से कहती आग्या कांई? आने का समाचार मिलते ही गली मोहल्ले के लोग चाय के लिए बुलाते और काकी सासुजी या भाभियां आट का हलवा बनातीं। जमाई खुद को ऐसा महसूस करता था कि वो पूरे गांव का जमाई है। जमाई के घर में आने के बाद घर के सब लोग अनुशासन में आ जाते थे। जमाई बाथरूम से निकलते तो उनके हाथ बढ़िया साबुन से धुलवाते, भले खुद लोकल साबुन से नहाते थे। जमाई अगर रात में रुक जाते तो सुबह उनका साला टूथ पेस्ट और ब्रश हाथ में लेकर आसपास घूमता रहता था। जब जमाई का अपनी बीवी को लेकर जाने का समय हो जाता तो वो स्कूटर को पहले गियर में डालकर भन्ना भोट निकालते थे, जिससे उनका ससुराल में प्रभाव बना रहता था। अब आज के जमाई की दुर्दशा अब आज के जमाई की दुर्दशा आज के जमाई से कोई भी लुगाई लाज नहीं करती है, खुद की बीवी भी वेस्टर्न ड्रेस में आसपास घूमती रहती है। काकी सासुजी और भाभी कोई दूसरी रिश्तेदारी निकाल कर बोलती हैं :- "अपने तो जमाई वाला रिश्ता है ही नहीं।" साला अगर कुंवारा है और अगर उसकी सगाई नहीं हो पा रही है तो इसका ताना जमाई को सुनाया जाएगा- "तुम्हारा हो गया इसका भी तो कुछ सेट करो।" पानी पीना हो तो खुद रसोई में जाना पड़ेगा, कोई लाकर देने वाला नहीं है। ससुराल पक्ष की किसी शादी में जमाई को इसीलिए ज्यादा मनवार करके बुलाया जाता है ताकि जमाई बच्चों को संभाल सके, बीवी और सासुजी आराम से महिला संगीत में डांस कर सकें। अगर बीवी को ससुराल में जरा सा कुछ कह दिया तो सासुजी की तरफ से तुरंत जवाब आता है "एक से एक रिश्ते आए थे, पर ये ही मिला था छोरी को दुखी करने के लिए। असीम जैन, इंदौर Collapse
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